उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के कारण मतदाता सूची में व्यापक फेरबदल देखने को मिल रहा है। इस प्रक्रिया के तहत राज्य के करीब 49,743 मतदाताओं के वोटों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं, जिससे आगामी राजनीतिक समीकरणों पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
मतदाता सूची में हो रहे इस बड़े बदलाव और बड़ी संख्या में नामों के समीक्षा के दायरे में आने से राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। राज्य की दो प्रमुख राजनीतिक पार्टियों, भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस, के नेताओं की टेंशन बढ़ गई है। दोनों ही दल अपने-अपने जनाधार को बचाने और चुनावी गणित को संतुलित करने के लिए रणनीतिक मंथन में जुट गए हैं।
चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को पारदर्शी और त्रुटिहीन बनाना है। हालांकि, इतनी बड़ी संख्या में मतों के प्रभावित होने से जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ गई है और दोनों प्रमुख दल इस स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
स्रोत: “Uttarakhand” – Google समाचार


